
फीफा वर्ल्ड कप 2026 शुरू होने में अब कुछ ही हफ्ते बचे हैं। टूर्नामेंट के 104 मैचों के लिए इस बार ऐसी प्राकृतिक घास तैयार की जा रही है, जो अलग-अलग मौसम और स्टेडियम की परिस्थितियों में भी एक जैसी खेले। इसके लिए फीफा ने करीब 47 करोड़ रुपए खर्च कर वैज्ञानिकों की टीम लगाई है। टीम ने पिछले 8 साल में 170 से ज्यादा प्रयोग किए हैं, ताकि खिलाड़ियों की चोट का खतरा घटे और ट्रैक्शन व बॉल बाउंस बेहतर रहे। 2024 के कोपा अमेरिका टूर्नामेंट में अर्जेंटीना के खिलाड़ियों ने अटलांटा स्टेडियम की अस्थाई प्राकृतिक घास की शिकायत की थी। उन्होंने कहा था कि पिच ‘डिजास्टर’ (बेहद खराब) है और गेंद ‘स्प्रिंगबोर्ड’ की तरह अजीब ढंग से उछल रही है। साल 2026 के वर्ल्ड कप में मेजबान अमेरिका, कनाडा और मैक्सिको ऐसी बदनामी से बचना चाहते हैं। 5 मिलीमीटर का अंतर भी बदल सकता है खेल का मिजाज टेनेसी यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर जॉन सोरोचन और मिशिगन स्टेट यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर ट्रे रोजर्स की देखरेख में वर्ल्ड कप के 16 स्टेडियमों के लिए पिच तैयार हो रही हैं। सोरोचन के मुताबिक घास की ऊंचाई में सिर्फ 5 मिलीमीटर का फर्क भी खेल का मिजाज बदल देता है। इसे परखने के लिए लैब के छोटे मैदानों पर चमकदार लाल रंग की मशीनों से फुटबॉल को शूट किया गया। इससे बॉल की स्पीड तक मापा गया।
Source link
Check Also
India Vs Ireland T20 Match Timings Update; Vaibhav Sooryavanshi
बेलफास्ट10 घंटे पहलेकॉपी लिंकवैभव सूर्यवंशी ने ट्राई सीरीज फाइनल में श्रीलंका-ए के खिलाफ 29 बॉल …