Wednesday , 5 August 2026

Rajasthan RPSC SC Order Violation


RAS भर्ती परीक्षा 2023 का फाइनल रिजल्ट 15 अक्टूबर 2025 को जारी किया गया था। इसके बावजूद राजस्थान लोक सेवा आयोग (RPSC) ने भर्ती परीक्षा के पूर्ण परिणाम, लिखित परीक्षा और साक्षात्कार के अंक और मेरिट रैंक सार्वजनिक नहीं किए है। सूचना का अधिकार अधिनियम –

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आयोग कहना है यह जानकारी कैंडिडेट की निजता यानि प्राइवेसी है। कैंडिडेट ने मुख्यमंत्री कार्यालय के मेल ID पर शिकायत दर्ज कराई है। खास बात ये है कि मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से सम्पर्क पोर्टल पर डालकर शिकायत को RPSC के बजाय राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड (RSSB) को भेज दिया।

RPSC क्यों छुपा रहा है नंबर? झुंझुनूं के रहने वाले रिटायर्ड सूबेदार अनिल कुमार का आरोप है कि RPSC रिजल्ट क्यों नहीं दिखा रहा, ये तो सुप्रीम कोर्ट के ऑर्डर का उल्लंघन है। सुप्रीम कोर्ट ने साफ कहा था कि एग्जाम के नंबर कोई प्राइवेट चीज नहीं है।

UPSC सिविल सेवा परीक्षा के अंतिम परिणाम में अभ्यर्थी का नाम, रोल नंबर, श्रेणी, लिखित और इंटरव्यू के अंक, कुल अंक और अंतिम रैंक तक सार्वजनिक करता है। अन्य चयन बोर्ड भी नाम, माता-पिता का नाम, अंक और मेरिट रैंक सार्वजनिक करता है। RPSC का कुछ भी न बताना शक पैदा करता है।

RPSC की शिकायत, भेजी कर्मचारी चयन बोर्ड को अनिल कुमार ने बताया- मामले में मुख्यमंत्री कार्यालय में शिकायत दर्ज कराई तो अफसरों ने सम्पर्क पोर्टल पर शिकायत अपलोड कर आरपीएससी काे भेजने के बजाय कर्मचारी चयन बोर्ड को भेज दी गई। जब इस पर वापस लिखा तो अब सम्बन्धित को भेजने की बात कही जा रही है। लेकिन शिकायत का अब तक समाधान नहीं हुआ।

RTI आवेदन के उत्तर में RPSC ने बार-बार निजता और तृतीय पक्ष की सूचना का हवाला देकर जानकारी देने से इनकार कर दिया जाता है। यहां तक कि प्रथम अपील में UPSC से जारी परिणामों का उदाहरण और सुप्रीम कोर्ट के आदेश का संदर्भ देने के बावजूद, बिना किसी सुनवाई के अपील को निरस्त कर दिया गया।

भास्कर ने मामले पर RPSC के सेक्रेटरी रामनिवास मेहता को फोन किया, लेकिन उनसे बात नहीं हो पाई।

कैंडिडेट ने मुख्यमंत्री कार्यालय को भेजी शिकायत में कुछ पुराने कोर्ट के फैसलों का हवाला दिया है।

  • 2011 का सीबीएसई बनाम आदित्य बंदोपाध्याय केस : सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि एग्जाम कैसे हुआ, कॉपी कैसे चेक हुई, ये सब बताना चाहिए, इसे छुपाने की जरूरत नहीं है।
  • 2018 का यूपीएससी बनाम अंगेश कुमार केस: सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि नौकरी देने के तरीके में ईमानदारी होनी चाहिए, नहीं तो ये कानून के खिलाफ होगा।
  • 2018 का कैनरा बैंक बनाम सीएस. श्याम केस: सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सिर्फ वही जानकारी प्राइवेट होगी, जिसका सरकारी काम से कोई लेना-देना नहीं है।
  • 2019 का सुभाष चंद्र अग्रवाल मामला: सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि निजता का अधिकार सबसे ऊपर नहीं है। अगर लोगों के फायदे के लिए जानकारी देना जरूरी है, तो उसे बताना चाहिए।
  • 2020–2024 का सीआईसी और हाईकोर्ट के फैसले: कोर्ट ने कहा कि सरकारी नौकरी के एग्जाम के नंबर प्राइवेट नहीं होते, क्योंकि उसी से नौकरी मिलती है और सरकार से सैलरी मिलती है।


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Tiwari Aka

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