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Bill introduced to annex Greenland to the US | अमेरिका में ग्रीनलैंड पर कब्जे का बिल पेश: 51वां राज्य बनाने का अधिकार मिलेगा, 300 सालों से यह डेनमार्क का हिस्सा


वॉशिंगटन डीसी48 मिनट पहले

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अमेरिकी सांसद रैंडी फाइन ने सोमवार को ‘ग्रीनलैंड एनेक्सेशन एंड स्टेटहुड एक्ट’ नाम से एक बिल पेश किया है। इस बिल का मकसद अमेरिकी सरकार को ग्रीनलैंड को अपने कब्जे में लेने और बाद में इसे अमेरिका का राज्य बनाने के लिए कानूनी अधिकार देना है।

सांसद रैंडी फाइन ने सोशल मीडिया पर पोस्ट करके इस बिल की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि यह कदम रूस-चीन के प्रभाव को रोकने के लिए बहुत जरूरी है। इसके बाद संसद को राज्य बनने के लिए जरूरी सुधारों की पूरी रिपोर्ट सौंपी जाएगी।

अगर ये बिल पास हुआ तो अमेरिका को ग्रीनलैंड को अपना 51वां राज्य बनाने का अधिकार मिल जाएगा। हालांकि, यह बिल अभी सिर्फ पेश हुआ है इसे हाउस और सीनेट दोनों में पास होना है।

कई एक्सपर्ट्स का कहना है कि यह बहुत मुश्किल से पास होगा, क्योंकि यह अंतरराष्ट्रीय कानून के खिलाफ है। ग्रीनलैंड पर पिछले 300 सालों से डेनमार्क का कंट्रोल है।

अमेरिकी सांसद कांग्रेसमैन रैंडी फाइन ने बिल पेश करने के बाद सोशल मीडिया पर यह पोस्टर शेयर किया।

अमेरिकी सांसद कांग्रेसमैन रैंडी फाइन ने बिल पेश करने के बाद सोशल मीडिया पर यह पोस्टर शेयर किया।

ट्रम्प ने बिल का समर्थन किया, बोले- ग्रीनलैंड अमेरिकी रक्षा के लिए जरूरी

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने इस प्रस्ताव का समर्थन किया। उन्होंने जोर देते हुए कहा है कि ग्रीनलैंड अमेरिकी रक्षा के लिए जरूरी है। उन्होंने हाल ही में कहा था कि अमेरिका को ग्रीनलैंड की जरूरत है और वे इस दिशा में कदम उठा रहे हैं, चाहे दूसरे देश इसे पसंद करें या नहीं।

ट्रम्प प्रशासन ने ग्रीनलैंड के लोगों को अमेरिका में शामिल होने के लिए पैसे देने जैसे तरीकों पर भी चर्चा की है। डेनमार्क और ग्रीनलैंड के अधिकारियों ने ट्रम्प के इस तरीके की कड़ी आलोचना की है। उन्होंने इसे अपमानजनक बताया।

अमेरिकी सांसद कांग्रेसमैन रैंडी फाइन ने सोमवार को संसद में बिल पेश किया।

अमेरिकी सांसद कांग्रेसमैन रैंडी फाइन ने सोमवार को संसद में बिल पेश किया।

अगर बिल पास हुआ तो ग्रीनलैंड में क्या बदलेगा

  • राष्ट्रपति को विशेष अधिकार मिलेंगे: बिल पास होने पर अमेरिकी राष्ट्रपति को कानूनी रूप से जरूरी सभी कदम उठाने का अधिकार मिल जाएगा। इसमें डेनमार्क के साथ बातचीत से लेकर अन्य तरीके शामिल हैं, ताकि ग्रीनलैंड को अमेरिकी क्षेत्र में मिलाया जा सके।
  • ग्रीनलैंड अमेरिकी क्षेत्र बनेगा: अगर कब्जा सफल हो जाता है, तो ग्रीनलैंड अमेरिकी टेरिटरी बन जाएगा।
  • स्टेटहुड की प्रक्रिया शुरू होगी: राष्ट्रपति को कांग्रेस को एक रिपोर्ट सौंपनी होगी, जिसमें बताना होगा कि ग्रीनलैंड को 51वां राज्य बनाने के लिए कौन-कौन से फेडरल कानून बदलने होंगे।
  • ग्रीनलैंड का संविधान बनेगा: इसके बाद ग्रीनलैंड को अपना एक संविधान बनाना होगा, जो अमेरिकी संविधान के अनुरूप हो। संसद इसे मंजूरी देगी और ग्रीनलैंड अमेरिका का पूर्ण राज्य बन सकता है (जैसे अलास्का बना था)।

ग्रीनलैंड पर हमले का प्लान बना रहे ट्रम्प

इससे पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ग्रीनलैंड पर कब्जा करने के लिए प्लान बनाने का निर्देश दिया था। डेली मेल के मुताबिक ट्रम्प ने जॉइंट स्पेशल ऑपरेशंस कमांड (JSOC) को यह जिम्मेदारी सौंपी है। हालांकि सैन्य अधिकारी इस विचार से सहमत नहीं दिख रहे हैं। वे इसे कानूनी रूप से गलत मानते हैं।

रिपोर्ट में कहा गया है कि ट्रम्प की यह रुचि घरेलू राजनीति से भी जुड़ी हो सकती है। इस साल के अंत में मिड-टर्म चुनाव होने वाले हैं और रिपब्लिकन ससंद पर कंट्रोल खोने से डर रहे हैं। इसलिए ट्रम्प कोई बड़ा कदम उठाकर लोगों का अर्थव्यवस्था की समस्याओं से ध्यान हटाना चाहते हैं।

ट्रम्प बोले- ग्रीनलैंड पर कब्जा नहीं किया तो रूस-चीन यहां आ जाएंगे

इससे पहले ट्रम्प ने शुक्रवार को बताया था कि अमेरिका के लिए ग्रीनलैंड पर कब्जा करना क्यों जरूरी है। उन्होंने व्हाइट हाउस में तेल और गैस कंपनियों के बड़े अधिकारियों के साथ हुई एक बैठक के दौरान कहा कि अगर अमेरिका ने ऐसा नहीं किया तो रूस और चीन जैसे देश इस पर कब्जा कर लेंगे।

ट्रम्प ने यह भी कहा कि ग्रीनलैंड को हासिल करना जमीन खरीदने का मसला नहीं है, यह रूस और चीन को दूर रखने से जुड़ा है। हम ऐसे देशों को अपना पड़ोसी बनते देख नहीं सकते।

ट्रम्प ने ग्रीनलैंड पर कब्जे करने के पीछे की वजह इस इलाके में रूसी और चीनी जहाजों की मौजूदगी को बताया।

ट्रम्प ने ग्रीनलैंड पर कब्जे करने के पीछे की वजह इस इलाके में रूसी और चीनी जहाजों की मौजूदगी को बताया।

ट्रम्प बोले- ग्रीनलैंड से आसान तरीके से सौदा चाहता हूं

ट्रम्प ने आगे कहा, अमेरिका अगर ग्रीनलैंड को आसान तरीके से हासिल नहीं कर पाया, तो दूसरे सख्त तरीके अपनाने होंगे। उन्होंने कहा, ‘हम ग्रीनलैंड के मुद्दे पर कुछ न कुछ करेंगे, चाहे उन्हें पसंद हो या न हो।’

उन्होंने पत्रकारों से कहा, ‘मैं चाहता हूं कि सौदा आसान तरीके से हो जाए।’ हालांकि, उन्होंने डेनमार्क के प्रति अपनी नरमी भी जताई और कहा, ‘वैसे मैं डेनमार्क का बहुत बड़ा फैन हूं। वे मेरे साथ बहुत अच्छे रहे हैं।’

जब उनसे पूछा गया कि क्या अमेरिका ग्रीनलैंड के लोगों को सीधे पैसे देकर उन्हें अमेरिका के साथ जुड़ने के लिए राजी करने की योजना बना रहा है। इसपर ट्रम्प ने कहा, ‘अभी मैं ग्रीनलैंड के लिए पैसे की बात नहीं कर रहा हूं। हो सकता है बाद में करूं।’ ट्रम्प ने इस मुद्दे को राष्ट्रीय सुरक्षा से जोड़ा।

ग्रीनलैंड PM बोले थे- हमारा देश बिकने वाला नहीं

ग्रीनलैंड के प्रधानमंत्री जेंस-फ्रेडरिक नीलसन ने कहा है कि जब अमेरिकी राष्ट्रपति ग्रीनलैंड को वेनेजुएला से जोड़कर सैन्य हस्तक्षेप की बात करते हैं, तो यह न केवल गलत है बल्कि हमारे लोगों के प्रति अनादर है।

नीलसन ने बयान जारी कर कहा था- मैं शुरू से ही शांत और स्पष्ट रूप से यह कहना चाहता हूं कि घबराहट या चिंता का कोई कारण नहीं है। केटी मिलर के पोस्ट से, जिसमें ग्रीनलैंड को अमेरिकी झंडे में लिपटा हुआ दिखाया गया है, इससे कुछ भी नहीं बदलता।

जानिए ग्रीनलैंड से अमेरिका को क्या फायदा

  • खास भौगोलिक स्थिति: ग्रीनलैंड की भौगोलिक स्थिति बहुत खास है। यह उत्तर अमेरिका और यूरोप के बीच, यानी अटलांटिक महासागर के बीचों-बीच के पास स्थित है। इसी वजह से इसे मिड-अटलांटिक क्षेत्र में एक बेहद अहम ठिकाना माना जाता है।
  • रणनीतिक सैन्य महत्व: ग्रीनलैंड यूरोप और रूस के बीच सैन्य और मिसाइल निगरानी के लिए बेहद अहम है। यहां अमेरिका का थुले एयर बेस पहले से है, जो मिसाइल चेतावनी और रूसी/चीनी गतिविधियों पर नजर रखने के लिए जरूरी है।
  • चीन और रूस पर नजर: आर्कटिक क्षेत्र में रूस और चीन की गतिविधियां बढ़ रही हैं। ग्रीनलैंड पर प्रभाव होने से अमेरिका इस इलाके में अपनी भू-राजनीतिक पकड़ मजबूत रखना चाहता है।
  • प्राकृतिक संसाधन: ग्रीनलैंड में दुर्लभ खनिज, तेल, गैस और रेयर अर्थ एलिमेंट्स के बड़े भंडार माने जाते हैं, जिनका भविष्य में आर्थिक और तकनीकी महत्व बहुत ज्यादा है। चीन इनका 70-90% उत्पादन नियंत्रित करता है, इसलिए अमेरिका अपनी निर्भरता कम करना चाहता है।
  • नई समुद्री व्यापारिक राहें: ग्लोबल वार्मिंग के कारण आर्कटिक की बर्फ पिघल रही है, जिससे नई शिपिंग रूट्स खुल रही हैं। ग्रीनलैंड का नियंत्रण अमेरिका को इन रूटों पर प्रभुत्व और आर्कटिक क्षेत्र में रूस-चीन की बढ़त रोकने में मदद करेगा।
  • अमेरिकी सुरक्षा नीति: अमेरिका ग्रीनलैंड को अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा की “फ्रंट लाइन” मानता है। वहां प्रभाव बढ़ाकर वह भविष्य के संभावित खतरों को पहले ही रोकना चाहता है।

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Tiwari Aka

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