



3 घंटे पहलेलेखक: आशीष तिवारी
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दुबई में आयोजित दैनिक भास्कर रियल्टी अवॉर्ड 2025 के दौरान एक्टर अनुपम खेर ने अपने बचपन के कुछ दिलचस्प किस्से शेयर किए। एक्टर ने बताया कि बचपन में बहुत गरीब थे। शिमला में एक कमरे में 14 लोग सोते थे। गरीबी में सबसे सस्ती चीज खुशी होती है। इस दौरान एक्टर ने यह भी बताया कि कैसे अपने घरवालों से प्रेरित होकर फिल्मों में कई दिलचस्प किरदार निभाए हैं।

पूरा परिवार एक ही कमरे में सोता था
पिछले इंटरव्यू में आपने पढ़ा कि अनुपम खेर ने कैसे अपनी मां के कहने पर शिमला में घर खरीदा। जबकि एक समय ऐसा भी था कि अनुपम खेर शिमला में एक कमरे में 14 लोगों के साथ सोते थे। अनुपम खेर कहते हैं- शिमला में जिस घर में रहा, उसमें तायाजी, चाचाजी, बुआजी और उनके बच्चे सब मिलाकर 14 लोग सोते थे।
गरीबी का डर मन से निकल गया
अनुपम खेर ने आगे बताया- उस समय हम बहुत गरीब थे, लेकिन बहुत खुश रहते थे। मैं 9वीं या 10वीं में रहा होगा। एक दिन दादाजी से पूछा कि हम इतने गरीब हैं फिर भी इतने खुश क्यों हैं? दादाजी ने बहुत अच्छा जवाब दिया। बोले- बेटा,जब इंसान बहुत गरीब होता है तब सबसे सस्ती चीज खुशी होती है। उनकी यह बात मेरे मन और दिल बैठ गई। इस बात का डर निकल गया कि मैं गरीब हूं।
अब गरीबी और अमीरी के मायने बदल गए हैं
अनुपम खेर कहते हैं- उस समय अमीर और गरीब ही कहा जाता था। अब थोड़ा इसके मायने बदल गए हैं। अब गरीब-अमीर के बजाय लोअर मिडिल क्लास, अपर मिडिल क्लास, अपर-अपर मिडिल क्लास, अपर क्लास कहा जाता है। अब खुशियां नहीं रही। हम पूरे परिवार के साथ रहते थे। हर किसी को बहुत नजदीक से पहचानते थे।
घर के सारे किरदार मेरे जेहन में घूंसे थे जो फिल्मों में नजर आएं
अनुपम खेर ने फिल्मों में ऐसे कई किरदार निभाए हैं जो उनके घरवालों से प्रेरित हैं। वह कहते हैं- मेरे चाचाजी आठवीं क्लास में सात बार फेल हुए। फिर उनको 9th में प्रमोट कर दिया गया था। वो सारे किरदार मेरे जेहन में इतने घूंसे थे कि जब मैंने फिल्में करनी शुरू की, तब मुझे लगा कि ‘दिल’ मे चाचा जी का रोल करता हूं। ‘दिल है कि मानता नहीं’ में किसी और का रोल करता हूं।

जॉइंट फैमिली के साथ रहने का अलग ही मजा है
अनुपम खेर कहते हैं- जॉइंट फैमिली के साथ रहने में जो मजा आता है, वह न्यूक्लियर फैमिली में नहीं आ सकता है। लेकिन, अब हालात बदल गए हैं। अब पति-पति दोनों जॉब कर रहे हैं। मेरी जिंदगी की नींव खुशहाली से भरी थी। दादाजी रोज रात को महाभारत, गीता और रामायण की कहानियां सुनाते थे। कोई नाराज होता था तो कोई ना कोई मनाने वाला था। मैंने इन बातों से बहुत सीखा। इसलिए मेरे कजिन और उनके बच्चों के साथ बहुत मजबूत रिश्ता है।
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अनुपम खेर का यह इंटरव्यू भी पढ़ें..
अनुपम खेर चार लोगों के साथ चॉल में रहे:10 साल से किराये के घर में हैं, मां की खुशी के लिए शिमला में बनाया आशियाना

दैनिक भास्कर रियल्टी अवॉर्ड 2025 के दौरान एक्टर अनुपम खेर ने रियल एस्टेट पर खुलकर बात की। उन्होंने कहा कि मैं जिस दौर से गुजर चुका हूं उसके बाद चीफ गेस्ट बनना कोई कमाल की बात नहीं है। इस दौरान उन्होंने मुंबई में अपने पहले आशियाने से लेकर शिमला में अपनी मां के लिए घर खरीदने के बहुत रोचक किस्से सुनाए। पूरा इंटरव्यू पढ़ें..
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