हरियाणा में गुरुग्राम सीट से कांग्रेस की टिकट कटने के बाद पूर्व मंत्री कैप्टन अजय सिंह यादव नाराज दिख रहे है। वहीं उनके बेटे और रेवाड़ी से विधायक चिरंजीव राव ने गुरुवार (2 मई) को अपने निवास पर कार्यकर्ताओं की बैठक बुला ली है। इस बैठक में कैप्टन अजय यादव भी मौजूद रहेंगे।
सुबह 11 बजे रेवाड़ी के मॉडल टाउन स्थित कैप्टन की कोठी पर होने वाली इस बैठक में रेवाड़ी से लेकर गुरुग्राम तक के अपने समर्थकों को बुलाया गया है। बैठक में कार्यकर्ताओं से चर्चा की जाएगी। कैप्टन टिकट कटने के बाद खुलकर अपनी नाराजगी जाहिर कर चुके है।
1 साल पहले शुरू की तैयारी
बता दें कि गुरुग्राम से पूर्व वित्तमंत्री और ओबीसी सेल के राष्ट्रीय चेयरमैन कैप्टन अजय सिंह यादव इस बार सबसे मजबूत दावेदारी पेश कर रहे थे। उन्होंने इसके लिए 1 साल पहले से ही तैयारियां शुरू कर दी थी। लेकिन फरवरी में टिकट को लेकर आवेदन मांगे जाने से कैप्टन के नाराज होने का सिलसिला शुरू हुआ और दो दिन पहले कैप्टन की टिकट काटकर फिल्म स्टार राज बब्बर को टिकट दे दी गई।
टिकट कटने की नाराजगी
इसके बाद कैप्टन खुलकर हमलावर हो गए। कैप्टन ने कहा कि यह पार्टी का निर्णय है, जो उन्हें मंजूर है। लेकिन प्रदेश में एक षड़यंत्र रचा जा रहा है। जिसके तहत बड़े नेताओं को दरकिनार किया जा रहा है। जिसमें मेरे अलावा बीरेंद्र सिंह, बृजिंद्र सिंह, श्रुति चौधरी शामिल हैं। लेकिन टिकट नहीं मिलने पर अब मैं पूरी तरह फ्री हो चुका हूं। हालांकि कैप्टन की नाराजगी अभी बनी हुई है।
कैप्टन का गुरुग्राम, नूंह और रेवाड़ी में खुद का जनाधार है। ऐसे में टिकट कटने के बाद कांग्रेस प्रत्याशी राज बब्बर को भीतरघात का भी सामना करना पड़ सकता है। हालांकि कैप्टन खुलकर बगावत करने के मूड में नहीं दिख रहे। लेकिन आज होने वाली कार्यकर्ताओं की बैठक में साफ हो जाएगा कि कैप्टन का आगामी रूख क्या रहने वाला है।
6 बार खुद अब बेटे चिरंजीव रेवाड़ी से विधायक
कैप्टन अजय सिंह ने अपना पहला चुनाव 1989 में रेवाड़ी सीट से लड़ा था। उसके बाद वे लगातार 6 बार 2014 तक विधायक रहे। हालांकि मोदी लहर में कैप्टन 2014 का विधानसभा चुनाव हार गए। इस दौरान कैप्टन अजय यादव सीएलपी लीडर, वित्त मंत्री सहित कई बड़े ओहदे पर रहे। 2019 के चुनाव लोकसभा चुनाव में कैप्टन ने खुद गुरुग्राम सीट से लोकसभा चुनाव तो बेटे चिरंजीव राव को रेवाड़ी सीट से चुनाव लड़ाया। चिरंजीव राव ने कांटे के मुकाबले में बीजेपी के प्रत्याशी सुनील मुसेपुर को हरा दिया था।
कैप्टन की लंबी राजनीतिक पारी में उनकी पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा और चौधरी भजनलाल से दोस्ती कुछ खास नहीं रही। दोनों ही पूर्व सीएम की सरकार में कैप्टन मंत्री जरूर रहे, लेकिन किन्हीं कारणों से अनबन बनी रही। कैप्टन अजय सिंह यादव ने पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा से खटपट के चलते 2014 के विधानसभा चुनाव से ठीक पहले तो मंत्री पद से इस्तीफा तक देने का ऐलान कर दिया था।
हालांकि उसके बाद कैप्टन को मना लिया गया। कैप्टन और हुड्डा के बीच काफी समय तक 36 का आंकड़ा रहा। हालांकि अब कुछ समय से कैप्टन और हुड्डा के बीच रिश्तों में मिठास घुलने लगी थी, लेकिन लोकसभा चुनाव को लेकर एक बार फिर ठन गई। कैप्टन इस बार खुलकर तो हुड्डा के खिलाफ कुछ नहीं बोले, लेकिन पार्टी प्रभारी दीपक बाबरिया से लेकर अन्य नेताओं पर इशारों में काफी बार निशाना साधा और कैप्टन की यहीं शैली उन्हें ले डूबी।