Sunday , 26 July 2026

स्कूलों में फोन बैन तो बच्चों में एकाग्रता बढ़ी:दो साल पहले लागू रोक में स्मार्टवॉच भी शामिल, अब पूरे देश में पाबंदी की तैयारी



नीदरलैंड्स के स्कूलों में दो साल पहले लागू स्मार्टफोन बैन का असर अब साफ दिखने लगा है। क्लासरूम, गलियारों और कैंटीन में मोबाइल के साथ स्मार्टवॉच और टेक्कनेट भी बाहर कर दिए गए हैं। स्कूल गेट पर लगे बोर्ड छात्रों को याद दिलाते हैं कि फोन सिर्फ लॉकर में रहेगा। सरकार अब इसे आगे बढ़ाते हुए 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर पाबंदी की वकालत कर रही है। सरकार के 317 माध्यमिक स्कूलों पर कराए अध्ययन में करीब 75% स्कूलों ने कहा कि छात्रों की एकाग्रता बढ़ी है। 66% स्कूलों ने सामाजिक माहौल बेहतर होने की पुष्टि की। वहीं, करीब एक-तिहाई स्कूलों में शैक्षणिक प्रदर्शन में भी सुधार दर्ज किया गया। कई छात्र कह रहे हैं कि डिजिटल दुनिया से बाहर निकलकर वे वर्तमान को ज्यादा जी पा रहे हैं। कानून नहीं, राष्ट्रीय सहमति से लागू हुआ बैन बनाना आसान हुआ है और बच्चे सरकार ने सख्त कानून बनाने के बजाय स्कूलों, अभिभावकों और शिक्षकों के साथ राष्ट्रीय समझौता किया था। मकसद लंबी कानूनी प्रक्रिया से बचते हुए सभी का सहयोग लेना और नियम तुरंत लागू करना था। शिक्षकों के मुताबिक फोन न होने से अनुशासन पढ़ाई पर ज्यादा ध्यान दे रहे हैं। ब्रेक और गलियारों में भी पहले जैसी अफरा-तफरी कम हुई है, जिससे माहौल ज्यादा शांत हुआ है। सुरक्षा बढ़ी, बुलिंग के मामले घटे फोन बैन के बाद छात्रों में यह डर कम हुआ है कि कोई उनको फोटो लेकर सोशल मीडिया पर डाल देगा। शुरुआती संकेत बताते हैं कि स्कूलों में बुलिंग के मामलों में भी कमी आई है। छात्रों का कहना है कि स्क्रीन से दूरी ने उन्हें ज्यादा सामाजिक बनाया है। युवा भी फोन पाबंदी के पक्ष में यूनिसेफ के सर्वे में 69% डच बच्चों और किशोरों ने 18 साल से कम उम्र के लिए सोशल मीडिया बैन का समर्थन किया। रिसर्च एजेंसी न्यूकॉम के मुताबिक 16 से 28 साल के 60% लोग भी उम्र सीमा तय करने के पक्ष में हैं। कर्नाटक और आंध्रा में भी स्क्रीन पर लगाम की तैयारी कर्नाटक सरकार ने छात्रों के लिए ‘डिजिटल रिस्पॉन्सिबिलिटी’ ड्राफ्ट पॉलिसी जारी की है। इसमें मनोरंजन के लिए स्क्रीन टाइम रोजाना एक घंटा सीमित करने और ‘चाइल्ड प्तान के तहत रात 7 बजे के बाद डेटा बंद करने जैसे सुझाव हैं। वहीं, आंध्र प्रदेश भी बच्चों के सोशल मीडिया उपयोग पर सख्त नियम लाने पर विचार कर रहा है।


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Tiwari Aka

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