
दुनिया का सबसे छोटा गणराज्य नाउरू जल्द ही अपना नाम बदल सकता है। संसद में एक प्रस्ताव पारित होने के बाद देश में जनमत संग्रह कराया जाएगा, जिसमें नागरिक तय करेंगे कि नाउरू का आधिकारिक नाम बदलकर ‘नाओएरो’ किया जाए या नहीं। राष्ट्रपति डेविड अडियांग ने संसद में कहा कि ‘नाओएरो’ नाम देश की विरासत, भाषा और पहचान का अधिक सम्मान करता है। प्रस्ताव बिना किसी विरोध के पारित हुआ है। सरकार के अनुसार, स्थानीय लोग अपनी भाषा में देश को ‘नाओएरो’ कहते हैं। हालांकि, विदेशी लोगों के लिए इसका उच्चारण कठिन होने के कारण आधिकारिक रिकॉर्ड में ‘नाउरू’ नाम प्रचलित हो गया। सरकार का कहना है कि यह बदलाव स्थानीय लोगों की पसंद नहीं बल्कि बाहरी सुविधा के लिए किया गया था। नाउरू का नाम कई बार बदल चुका है। 1798 में एक ब्रिटिश नाविक ने इसका नाम ‘प्लेजेंट आइलैंड’ रखा था। 1888 में जर्मनी के कब्जे के बाद ‘नाउरू’ नाम आधिकारिक दस्तावेजों में दर्ज हुआ। बाद में ऑस्ट्रेलियाई प्रशासन ने भी यही नाम जारी रखा। देश को 1968 में स्वतंत्रता मिली। विशेषज्ञों का मानना है कि मूल नामों की वापसी केवल भाषाई बदलाव नहीं बल्कि सांस्कृतिक अधिकार और आत्मनिर्णय का प्रतीक है। दुनिया के कई देशों ने भी अपनी स्थानीय पहचान को मजबूत करने के लिए नाम बदले हैं। यूनेस्को नाउरू की मूल भाषा को गंभीर रूप से संकटग्रस्त मानता है। ऐसे में विशेषज्ञों का कहना है कि ‘नाओएरो’ नाम अपनाने से भाषा संरक्षण और सांस्कृतिक निरंतरता को बढ़ावा मिल सकता है।
अंतरराष्ट्रीय मामलों से जुड़ी अन्य बड़ी खबरें… अल्बानिया में ट्रम्प के दामाद के रिसॉर्ट प्रोजेक्ट के खिलाफ हजारों लोग सड़कों पर उतरे अल्बानिया की राजधानी तिराना में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के दामाद जैरेड कुशनर के लग्जरी रिसॉर्ट प्रोजेक्ट के खिलाफ हजारों लोगों ने प्रदर्शन किया। करीब 55 हजार करोड़ रुपए की लागत वाले इस प्रोजेक्ट का विरोध पर्यावरण की चिंता की वजह से हो रहा है। दरअसल, यह रिसॉर्ट एक संरक्षित तटीय इलाके के पास बनाया जाना है। यह क्षेत्र फ्लेमिंगो, सील और समुद्री कछुओं जैसे वन्यजीवों का आवास माना जाता है। प्रदर्शनकारियों ने ‘अल्बानिया बिकाऊ नहीं है’ जैसे पोस्टर लेकर सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। उनका आरोप है कि प्रोजेक्ट को लेकर पारदर्शिता नहीं बरती गई और विदेशी निवेशकों को फायदा पहुंचाया जा रहा है। प्रधानमंत्री एडी रामा ने कहा है कि प्रोजेक्ट तय योजना के अनुसार आगे बढ़ेगा और जिम्मेदारी के साथ पूरा किया जाएगा। चीन में जोरदार धमाका; 7 लोगों की मौत, 17 घायल चीन के गुआनशी क्षेत्र में हुए एक जोरदार धमाके में 7 लोगों की मौत हो गई, जबकि 17 अन्य घायल हुए हैं। स्थानीय प्रशासन के मुताबिक, सभी घायलों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है और घायलों की हालत खतरे से बाहर है। अधिकारियों ने शुरुआती जांच में गैस पाइपलाइन को हादसे की वजह मानने से इनकार किया है। अभी यह साफ नहीं हो पाया है कि धमाका किस वजह से हुआ। फिलहाल धमाके के कारणों का पता लगाने के लिए जांच जारी है। घटना के बाद इलाके में राहत और बचाव अभियान चलाया गया। भारतीय मूल का कारोबारी अमेरिका में करोड़ों डॉलर की बैंक धोखाधड़ी के आरोप में गिरफ्तार
अमेरिका के कैलिफोर्निया में रहने वाले भारतीय मूल के कारोबारी महेंद्र माखिजानी को करीब 10 करोड़ डॉलर की कथित बैंक धोखाधड़ी के मामले में गिरफ्तार किया गया है। अमेरिकी न्याय विभाग के अनुसार, उन्होंने फर्जी दस्तावेजों के जरिए रियल एस्टेट लोन को वास्तविकता से अधिक सुरक्षित दिखाकर बैंक को भारी वित्तीय जोखिम में डाल दिया। 44 वर्षीय माखिजानी न्यूपोर्ट बीच स्थित कैंटर ग्रुप को नियंत्रित करते थे। अदालत में पेश दस्तावेजों के मुताबिक कंपनी का एक फेडरल इंश्योर्ड बैंक के साथ समझौता था, जिसके तहत बैंक ने रियल एस्टेट आधारित लोन उपलब्ध कराने के लिए करीब 10 करोड़ डॉलर दिए थे। समझौते की शर्त थी कि कंपनी केवल उन्हीं लोन को बैंक के पास गिरवी रखेगी, जिनमें उसके पास संबंधित संपत्ति पर ‘फर्स्ट लियन’ अधिकार होगा। ऐसे लोन अधिक सुरक्षित माने जाते हैं क्योंकि डिफॉल्ट की स्थिति में भुगतान का पहला अधिकार उसी ऋणदाता को मिलता है। अभियोजन पक्ष का आरोप है कि सितंबर 2024 से अप्रैल 2025 के बीच टाइटल इंश्योरेंस रिकॉर्ड में बदलाव कर यह दिखाया गया कि कैंटर ग्रुप के पास फर्स्ट लियन अधिकार है, जबकि वास्तविकता में अन्य लेनदारों की प्राथमिक दावेदारी थी। जांचकर्ताओं के अनुसार, दस्तावेजों में कथित हेरफेर Adobe सॉफ्टवेयर के जरिए किया गया। बदलाव छिपाने के लिए मेटाडेटा हटाने और दस्तावेजों को दोबारा स्कैन करने जैसे तरीके भी अपनाए गए। बाद में यही रिकॉर्ड बैंक को सौंपे गए। शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि बैंक द्वारा उठाए गए सवालों के जवाब में माखिजानी ने भ्रामक स्पष्टीकरण दिए। दिसंबर 2024 में कथित तौर पर एक ऐसी स्प्रेडशीट भी बैंक को भेजी गई, जिसमें टाइटल संबंधी विसंगतियों के गलत कारण बताए गए थे। अमेरिकी न्याय विभाग के मुताबिक दोषी साबित होने पर माखिजानी को अधिकतम 30 साल तक की जेल हो सकती है। अगस्त 2025 में संबंधित बैंक ने इस मामले में लॉस एंजिलिस सुपीरियर कोर्ट में मुकदमा भी दायर किया है।
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