Monday , 11 May 2026

रील स्क्रॉलिंग भी जंक फूड की तरह; मेमोरी -फोकस कमजोर:माता-पिता का स्क्रीन टाइम ज्यादा, तो बच्चों में फोन की लत लगने के चांस ज्यादा



लोगों में रील्स देखने की आदत बढ़ रही है। खासकर बच्चों और युवाओं में यह आदत देखी जाती है, लेकिन बड़े भी इससे उतने ही प्रभावित हैं। वे खुद स्क्रीन टाइम को कम नहीं कर पाते और बच्चों के लिए उदाहरण बनते हैं। लेकिन रील स्क्रॉल के कई दुष्प्रभाव हैं। इससे आपकी याद्दाश्त और ध्यान भी कमजोर होता है। ऐसे में जानें फोन एडिक्शन की साइंस और बचाव के तरीके। स्क्रीन टाइम से ज्यादा देखे जा रहे कंटेंट के बारे में सोचें स्क्रीन टाइम निर्धारित नहीं करता कि आपको फोन की लत है। इंस्टाग्राम जैसे सोशल मीडिया एप्स, जिनमें हम रैंडम रील्स स्क्रॉल करते हैं, वे ‘जंक फूड’ की तरह हैं। कॉर्नेल यूनिवर्सिटी, न्यूयॉर्क की स्टडी के मुताबिक इस तरह के कंटेंट की आदत याददाश्त और फोकस को प्रभावित कर सकती है। इसलिए इस तरह के एप्स से दूरी बनाना ज्यादा जरूरी है। आदत कम करने के लिए फैमिली मीडिया प्लान बनाएं प्रो.जेसन नागाटा के अनुसार, जिन माता-पिता का स्क्रीन टाइम ज्यादा होता है, उनके बच्चों में भी फोन की लत ज्यादा देखने को मिलती है। इसे कम करने के लिए अपना फैमिली मीडिया प्लान बनाएं। यानी घर में कुछ नियम तय करें, जैसे खाने और सोने के समय फोन न इस्तेमाल करना। फोन को बेडरूम और डाइनिंग टेबल से दूर रखना। जानें कब फोन चलाना हमारी आदत बन जाती है फोन का ज्यादा इस्तेमाल करना और लत लगना, दो अलग बातें है। यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया, सैन फ्रांसिस्को के एसोसिएट प्रो. जेसन नागाटा इसकी तुलना नशे की लत से करते हैं। अगर कोई व्यक्ति ज्यादा समय सोशल मीडिया पर बिताने लगे, दोस्तों से दूरी बनाने लगे या पढ़ाई- काम पर असर दिखने लगे, तो यह संकेत है कि अब इस पर ध्यान देने की जरूरत है।


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Tiwari Aka

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