Wednesday , 5 August 2026

एआई बेस्ड विजुअल सिस्टम इमारतों के अंदर का नेविगेशन बताएगा:GPS का विकल्प खोजने की दौड़, 3 नई तकनीक पर जोर



दुनिया की सबसे भरोसेमंद लोकेशन तकनीक मानी जाने वाली जीपीएस प्रणाली अब कमजोर पड़ती दिख रही है। अमेरिका ने स्पेस रेस के दौरान इसे विकसित किया था, लेकिन वॉलस्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट के अनुसार यह बहुत कमजोर सैटेलाइट सिग्नल पर निर्भर करती है, जिन्हें ब्लॉक या जाम करना अपेक्षाकृत आसान है। ऐसे में दुनिया के बड़े स्टार्टअप्स इसके विकल्प बनाने की तैयार शुरू कर चुके हैं। जीपीएस के विकल्प पर काम जारी इंजीनियर लंबे समय से ऐसी तकनीकों पर काम कर रहे हैं जो सैटेलाइट पर निर्भर न हों। 1. क्वांटम नेविगेशन: यह तकनीक पृथ्वी की मैग्नेटिक फील्ड और माइक्रो इम्प्रूवमेंट्स को मापकर लोकेशन तय करती है। ब्रिटेन की कंपनी Q-CTRL इस पर काम कर रही है। 2. AI-आधारित विजुअल नेविगेशन: यह सिस्टम कैमरों से आसपास के दृश्य पहचानकर रास्ता तय करता है। कैमरा इमारतें, सड़कें, पहाड़, लैंडमार्क पहचानता है और एआई उन्हें मैप से मिलाकर लोकेशन निकालता है। यह इमारतों की ऊंचाई और मंजिलों की संख्या का भी अनुमान लगा सकता है। 3. इनर्शियल नेविगेशन सिस्टम: यह सेंसर बेस्ड सिस्टम है जो एक्सेलेरोमीटर जायरोस्कोप से यह भी पता लगाता है कि वाहन कितनी गति में चला। जामिंग से बन रहे ‘जीपीएस डेड जोन’ रूस-यूक्रेन सीमा और स्ट्रेज ऑफ होर्मुज जैसे संवेदनशील इलाकों में जीपीएस जामिंग आम होती जा रही है। छोटे-छोटे जैमर, जिनकी कीमत 100 डॉलर से भी कम हो सकती है, हजारों किलोमीटर दूर से आने वाले सैटेलाइट सिग्नल को दबा देते हैं। यही वजह है कि जीपीएस कमजोर पड़ रहा है।


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Tiwari Aka

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