Friday , 5 June 2026

इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन में हवा का रिसाव:नासा ने एस्ट्रोनॉट्स को स्पेस क्राफ्ट में छिपने को कहा, इमरजेंसी में वापस लाने की तैयारी



इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन (ISS) में हवा का रिसाव बढ़ने के बाद नासा ने तुरंत एक्शन लिया और एस्ट्रोनॉट्स को स्पेसक्राफ्ट में छिपने और सुरक्षित निकलने (इवैक्युएशन) के लिए तैयार रहने का आदेश दिया। हालांकि, करीब दो घंटे की मशक्कत और जांच के बाद स्थिति नियंत्रण में देखकर इस आदेश को वापस ले लिया गया। स्पेस स्टेशन के 27 साल के इतिहास में इस तरह के अलर्ट बेहद दुर्लभ माने जाते हैं। दरअसल, स्पेस स्टेशन के रूसी हिस्से में हवा लीक होने की रफ्तार अचानक दोगुनी हो गई। खतरे को देखते हुए अमेरिकी स्पेस एजेंसी नासा ने अंतरिक्ष यात्रियों को इमरजेंसी अलर्ट जारी किया था। स्टेशन पर इस समय 7 अंतरिक्ष यात्री मौजूद हैं इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन पर इस समय दो अलग-अलग मिशन के कुल 7 एस्ट्रोनॉट्स रह रहे हैं। स्पेसक्राफ्ट के अंदर बिताए दो घंटे, पहनने पड़े स्पेससूट नासा की प्रवक्ता बेथानी स्टीवंस के मुताबिक, शुक्रवार को अमेरिकी समयानुसार सुबह 9:04 बजे (भारतीय समयानुसार शाम करीब 6:34 बजे) ह्यूस्टन स्थित मिशन कंट्रोल से अंतरिक्ष यात्रियों को सुरक्षित ठिकानों पर जाने का आदेश मिला। नासा के ‘क्रू-12’ मिशन के 4 सदस्यों के साथ एक अन्य अमेरिकी अंतरिक्ष यात्री को तुरंत स्पेस स्टेशन से जुड़े स्पेसएक्स के ‘क्रू ड्रैगन’ कैप्सूल के अंदर जाने को कहा गया। यात्रियों को हिदायत दी गई थी कि वे अपने स्पेससूट पहन लें, ताकि हवा का रिसाव ज्यादा बढ़ने पर उन्हें तुरंत स्पेस स्टेशन से धरती पर वापस लाया जा सके। रूस के ज्वेज्दा मॉड्यूल में आई खराबी यह पूरी गड़बड़ी इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन के रूसी हिस्से में मौजूद ‘ज्वेज्दा’ सर्विस मॉड्यूल में हुई है। स्पेस स्टेशन को मुख्य रूप से नासा और रूस की स्पेस एजेंसी ‘रोस्कोस्मोस’ मिलकर चलाते हैं। ज्वेज्दा मॉड्यूल में पिछले कुछ महीनों से छोटे-छोटे एयर लीक हो रहे हैं, जिसे लेकर नासा और रूसी वैज्ञानिकों के बीच इसके कारणों और मरम्मत के तरीकों पर लंबे समय से बहस चल रही है। शुक्रवार को रोस्कोस्मोस की तरफ से इस घटना पर तुरंत कोई आधिकारिक बयान नहीं आया। एक पाउंड से बढ़कर दो पाउंड हुई हवा लीक होने की रफ्तार एक सीनियर नासा अधिकारी ने बताया कि पिछले कुछ महीनों से हवा का रिसाव बहुत मामूली था, जिससे कोई बड़ा खतरा नहीं था। लेकिन शुक्रवार को यह अचानक एक पाउंड प्रति दिन से बढ़कर दो पाउंड प्रति दिन पर पहुंच गया। लीक की रफ्तार दोगुनी होते ही नासा के वैज्ञानिक सतर्क हो गए और उन्होंने यात्रियों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए तुरंत ‘सेफ-हेवन’ (सुरक्षित ठिकाने पर जाने की) प्रक्रिया शुरू कर दी। रूसी एस्ट्रोनॉट्स ने आरी से काटने की कोशिश की, नासा विरोध किया जिस समय नासा ने यह अलर्ट जारी किया, उस समय स्पेस स्टेशन पर मौजूद दो रूसी कॉस्मोनॉट्स (अंतरिक्ष यात्री) सर्गेई कुद-स्वेरचकोव और सर्गेई मिकायेव ने इस इवैक्यूएशन ड्रिल में भाग नहीं लिया। वे स्टेशन के उस हिस्से में मौजूद दरार को ढूंढने के लिए एक आरी का इस्तेमाल कर रहे थे, जहां से हवा लीक होने का शक था। नासा के अधिकारियों ने रूसी यात्रियों के इस तरीके (आरी के इस्तेमाल) पर असहमति जताई। नासा का मानना था कि इससे खतरा और बढ़ सकता है, इसी मतभेद के बाद नासा ने अपने यात्रियों को तुरंत स्पेसक्राफ्ट में जाने का आदेश दे दिया। 27 साल के इतिहास में कभी खाली नहीं करना पड़ा ISS स्पेस स्टेशन पर ‘सेफ-हेवन’ जैसे आदेश बहुत कम दिए जाते हैं। आमतौर पर ऐसा तब होता है जब अंतरिक्ष का कचरा स्टेशन से टकराने वाला हो या हवा के दबाव में कोई बड़ा बदलाव आए। अच्छी बात यह है कि पिछले 27 साल से लगातार इंसानों के घर बने हुए इस स्पेस स्टेशन को आज तक कभी भी आपातकालीन स्थिति में पूरी तरह खाली नहीं करना पड़ा है। इस बार भी दो घंटे बाद स्थिति की समीक्षा कर नासा ने अलर्ट हटा दिया और यात्री वापस स्टेशन के काम में जुट गए। इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन क्या है? इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन पृथ्वी के चारों ओर घूमने वाला एक बड़ा अंतरिक्ष यान है। इसमें एस्ट्रोनॉट रहते हैं और माइक्रो ग्रेविटी में एक्सपेरिमेंट करते हैं। यह 28,000 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से ट्रैवल करता है। यह हर 90 मिनट में पृथ्वी की परिक्रमा पूरी कर लेता है। 5 स्पेस एजेंसीज ने मिलकर इसे बनाया है। स्टेशन का पहला पीस नवंबर 1998 में लॉन्च किया गया था। ———————— ये खबर भी पढ़ें… स्पेस स्टेशन में 18 दिन रहकर लौटे शुभांशु: स्पेसक्राफ्ट की लैंडिंग कैलिफोर्निया के तट पर हुई, पहली बार कोई भारतीय ISS गया था शुभांशु शुक्ला सहित चार एस्ट्रोनॉट स्पेस स्टेशन में 18 दिन रहने के बाद पृथ्वी पर लौट आए हैं। करीब 23 घंटे के सफर के बाद ड्रैगन स्पेसक्राफ्ट की आज यानी 15 जुलाई को दोपहर 3 बजे कैलिफोर्निया के तट पर लैंडिंग हुई। इसे स्प्लैशडाउन कहते हैं। चारों एस्ट्रोनॉट एक दिन पहले यानी सोमवार की शाम 4:45 बजे इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन से पृथ्वी के लिए रवाना हुए थे। पूरी खबर पढ़ें…


Source link

Tiwari Aka

Check Also

Maruti WagonR Flex Fuel Car Launched in India

नई दिल्ली4 घंटे पहलेकॉपी लिंकमारुति सुजुकी ने आज (4 जून) भारत में पहली फ्लेक्स-फ्यूल कार …

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *