Sunday , 19 July 2026

बौद्ध धर्मगुरु दलाई लामा 91 वर्ष के हुए:धर्मशाला-लद्दाख में उमड़ा श्रद्धा का सैलाब, पीएम मोदी का बधाई संदेश- विश्व शांति के लिए उनकी प्रतिबद्धता सराहनीय



विश्व प्रसिद्ध बौद्ध धर्मगुरु दलाई लामा सोमवार को 91 वर्ष के हो गए हैं। इस विशेष अवसर पर हिमाचल प्रदेश के धर्मशाला स्थित उनके अस्थायी निवास स्थान के मुख्य तिब्बती मंदिर ‘त्सुगलाखंग प्रांगण’ में एक भव्य समारोह आयोजित किया गया। केंद्रीय तिब्बती प्रशासन (सीटीए) और स्थानीय तिब्बती समुदाय द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में देश-विदेश से आए सैकड़ों बौद्ध अनुयायियों, पर्यटकों और स्थानीय भारतीय नागरिकों ने उत्साहपूर्वक हिस्सा लिया। दलाई लामा के बारे में जानें- नोबेल शांति पुरस्कार मिल चुका है जन्म: 6 जुलाई 1935 को पूर्वोत्तर तिब्बत के ताकत्सेर गांव में हुआ। भारत आगमन: वर्ष 1959 में तिब्बत पर चीनी आक्रमण के बाद वे भारत आए और तब से धर्मशाला को अपना निवास स्थान बनाकर विश्व को शांति का संदेश दे रहे हैं। वैश्विक सम्मान: विश्व शांति और अहिंसा के प्रति उनके अभूतपूर्व योगदान के लिए उन्हें वर्ष 1989 में प्रतिष्ठित नोबेल शांति पुरस्कार से सम्मानित किया जा चुका है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दी दीर्घायु की शुभकामनाएं दलाई लामा के जन्मदिन पर भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (ट्विटर) पर पोस्ट कर उन्हें बधाई दी। पीएम मोदी ने लिखा कि दलाई लामा को जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनाएं। शांति और सद्भाव का उनका संदेश दुनिया भर के लोगों के लिए एक मार्गदर्शक शक्ति रहा है। उनकी नैतिक और आध्यात्मिक शक्ति तथा वैश्विक कल्याण के प्रति उनकी प्रतिबद्धता सराहनीय है। मैं उनके लंबे और स्वस्थ जीवन की कामना करता हूं।” राष्ट्रगान और विशेष प्रार्थना से हुई कार्यक्रम की शुरुआत धर्मशाला में आयोजित इस समारोह में कांगड़ा के उपायुक्त (डीसी) हेमराज बैरवा मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। कार्यक्रम की औपचारिक शुरुआत भारत और तिब्बत के राष्ट्रगान के साथ की गई। इसके बाद दलाई लामा की लंबी उम्र और उनके अच्छे स्वास्थ्य की कामना करते हुए विशेष प्रार्थना सभा का आयोजन किया गया और केक काटा गया। मुख्य अतिथि का संबोधन: दलाई लामा शांति और करुणा के जीवंत प्रतीक मुख्य अतिथि डीसी हेमराज बैरवा ने राज्य सरकार की ओर से शुभकामनाएं देते हुए कहा कि दलाई लामा केवल एक वैश्विक आध्यात्मिक गुरु नहीं, बल्कि संघर्ष और विभाजन से त्रस्त इस आधुनिक विश्व में शांति, करुणा और सार्वभौमिक उत्तरदायित्व के जीवंत प्रतीक हैं। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि असली सुख भौतिकता में नहीं, बल्कि दयालु हृदय और क्षमा में है। इसके साथ ही डीसी ने क्षेत्र के पर्यटन और अर्थव्यवस्था में तिब्बती समुदाय के योगदान की सराहना की। सांस्कृतिक प्रस्तुतियां और आधिकारिक संदेशों का वाचन समारोह के दौरान तिब्बती स्कूलों और ‘तिब्बती प्रदर्शन कला संस्थान’ के कलाकारों ने अपनी पारंपरिक सांस्कृतिक प्रस्तुतियां देकर समां बांधा। इस मौके पर निर्वासित तिब्बती संसद के उपाध्यक्ष खेनपो सोनम टेनफेल और कार्यवाहक सिक्योंग त्सेग्याल चुक्या द्रानी ने क्रमशः संसद और काशाग (कैबिनेट) का आधिकारिक संदेश पढ़ा। इसके अतिरिक्त, उत्कृष्ट सेवाओं के लिए सीटीए के कई सिविल सेवकों को भी सम्मानित किया गया।


Source link

Tiwari Aka

Check Also

World News Updates; US Iran Israel Breaking NewsUNGA Netanyahu Visit Controversy

Hindi NewsInternationalWorld News Updates; US Iran Israel Breaking NewsUNGA Netanyahu Visit Controversy | New York …

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *