





नई दिल्ली54 मिनट पहले
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अगर कोई फोटो, वीडियो या ऑडियो एआई की मदद से बनाया गया है, तो उस पर ‘लेबल’ लगाना जरूरी कर दिया गया है। इसके साथ ही सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को किसी भी आपत्तिजनक कंटेंट को शिकायत मिलने के महज 3 घंटे के भीतर हटाना होगा। ये नए नियम 20 फरवरी 2026 से लागू हो गए हैं। 10 फरवरी को इसका नोटिफिकेशन जारी हुआ था।
पीएम बोले- कंटेंट पर ‘ऑथेंटिसिटी लेबल’ की जरूरत
इन नियमों के लागू होने से एक दिन पहले यानी, 19 फरवरी को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने AI समिट में भी लेबल को लेकर सुझाव दिया था। उन्होंने कहा था कि जैसे खाने के सामान पर ‘न्यूट्रिशन लेबल’ होता है, वैसे ही डिजिटल कंटेंट पर भी लेबल होना चाहिए। इससे लोगों को पता चल सकेगा कि क्या असली है और क्या फैब्रिकेटेड, यानी एआई से बनाया गया है।

मेटाडेटा से छेड़छाड़ की तो डिलीट होगा पोस्ट
1. एआई लेबल: वीडियो पर ‘डिजिटल स्टैम्प’
- जैसे खाने के पैकेट पर लिखा होता है कि वह ‘शाकाहारी’ है या ‘मांसाहारी’, ठीक वैसे ही अब हर एआई वीडियो, फोटो या ऑडियो पर एक लेबल लगा होगा।
- मान लीजिए आपने एआई से एक वीडियो बनाया जिसमें कोई नेता भाषण दे रहा है, तो उस वीडियो के कोने में साफ लिखा होना चाहिए- “AI जनरेटेड”।
2. टेक्निकल मार्कर: डिजिटल डीएनए
- मेटाडेटा को आप उस फाइल का ‘डिजिटल डीएनए’ मान सकते हैं। यह स्क्रीन पर तो नहीं दिखता, लेकिन फाइल की कोडिंग के अंदर छिपा होता है।
- इसमें यह जानकारी दर्ज होगी कि यह फोटो या वीडियो किस तारीख को बना, किस AI टूल से बना और किस प्लेटफॉर्म पर पहली बार अपलोड हुआ।
- अगर कोई एआई का इस्तेमाल करके अपराध करता है, तो पुलिस इस ‘टेक्निकल मार्कर’ के जरिए उसके असली सोर्स तक पहुंच सकेगी।
3. छेड़छाड़ पर रोक: मिटाया नहीं जा सकेगा लेबल
- पहले लोग एआई से बनी फोटो का कोना काटकर या एडिटिंग करके उसका ‘वॉटरमार्क’ हटा देते थे ताकि वह असली लगे। अब सरकार ने इसे गैर-कानूनी बना दिया है।
- सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को ऐसी तकनीक अपनानी होगी कि अगर कोई उस लेबल या मेटाडेटा को हटाने की कोशिश करे, तो या तो वह कंटेंट ही डिलीट हो जाए।
चाइल्ड पोर्नोग्राफी और डीपफेक पर सख्त एक्शन
अगर AI का इस्तेमाल चाइल्ड पोर्नोग्राफी, अश्लीलता, धोखाधड़ी, हथियारों से जुड़ी जानकारी या किसी की नकल उतारने के लिए किया जाता है, तो इसे गंभीर अपराध माना जाएगा।

नवंबर में रश्मिका मंदाना का डीपफेक वीडियो वायरल हुआ था।

सचिन तेंदुलकर का डीपफेक वीडियो, जिसमें वे गेमिंग ऐप को प्रमोट करते दिखे थे।
3 घंटे की डेडलाइन, पहले 36 घंटे का समय मिलता था
आईटी नियमों में हुए नए बदलाव के बाद अब सोशल मीडिया कंपनियों के पास कार्रवाई के लिए बहुत कम समय होगा। पहले किसी गैर-कानूनी कंटेंट को हटाने के लिए 36 घंटे का समय दिया जाता था, जिसे अब घटाकर सिर्फ 3 घंटे कर दिया गया है।
यूजर ने गलत जानकारी दी तो प्लेटफॉर्म जिम्मेदार
अब जब भी कोई यूजर सोशल मीडिया पर कुछ अपलोड करेगा, तो प्लेटफॉर्म को उससे यह डिक्लेरेशन लेनी होगी कि क्या यह कंटेंट एआई से बनाया गया है। कंपनियों को ऐसे टूल्स तैनात करने होंगे जो यूजर के इस दावे की जांच कर सकें। अगर कोई प्लेटफॉर्म एआई कंटेंट को बिना डिस्क्लोजर के पब्लिश होने देता है, तो इसके लिए वह खुद जिम्मेदार माना जाएगा।
केंद्र ने कहा- इससे इंटरनेट ज्यादा भरोसेमंद बनेगा
सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने साफ कहा कि ये स्टेप ‘ओपन, सेफ, ट्रस्टेड और अकाउंटेबल इंटरनेट’ बनाने के लिए है। यह जनरेटिव AI से आने वाली मिस-इनफॉर्मेशन, इम्पर्सनेशन और इलेक्शन मैनिपुलेशन जैसी रिस्क्स को हैंडल करेगा। इससे इंटरनेट ज्यादा भरोसेमंद बनेगा।
नॉलेज पार्ट: डीपफेक के बारे में जानें
इसमें एआई का इस्तेमाल करके किसी असली व्यक्ति के चेहरे या आवाज को दूसरे वीडियो में बदल दिया जाता है, जिससे वह बिल्कुल असली लगता है।
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