


तेहरान/वॉशिंगटन/तेलअवीव4 मिनट पहले
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इजराइल ने 1 अप्रैल को सीरिया में ईरानी दूतावास के पास हिजबुल्लाह के ठिकानों पर हमला किया था। इस आतंकी संगठन को ईरान सपोर्ट करता है। इसलिए इजराइल से बदला लेना चाहता है। (फाइल)
ईरान ने अमेरिका को धमकी दी है जिसके बाद अमेरिकी सेना हाई अलर्ट पर है। यह मामला सीरिया में ईरानी वाणिज्य दूतावास पर हुए हमले से जुड़ा है।
दरअसल, 1 अप्रैल को इजराइल ने सीरिया में ईरानी वाणिज्य दूतावास के पास एयरस्ट्राइक की थी। इसमें ईरान के दो आर्मी कमांडर्स समेत 13 लोग मारे गए थे। इसके बाद ईरान ने इजराइल को बदला लेने की धमकी दी थी।
इस मामले को लेकर ईरान ने अमेरिका को भी धमकी दी है कि वो ईरान और इजराइल के बीच न आए। राजनीतिक मामलों के लिए ईरानी राष्ट्रपति के डिप्टी चीफ ऑफ स्टाफ मोहम्मद जमशीदी ने अमेरिका से कहा, “इजराइली PM बेंजामिन नेतन्याहू के जाल में न फंसे। अगर आप चाहते हैं कि हमले में आपको नुकसान न हो तो मामले से दूर रहें।
जमशीदी ने कहा है कि अमेरिका ने धमकी के जवाब में कहा है कि उनके ठिकानों पर हमला न किया जाए। हालांकि, अमेरिका ने आधिकारिक तौर पर धमकी का जवाब नहीं दिया है। वहीं, अमेरिकी मीडिया CNN ने अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से अपनी रिपोर्ट में लिखा, “ईरान के इजराइली और अमेरिकी ठिकानों पर हमले को लेकर अमेरिकी सेना हाई अलर्ट पर है।”

अमेरिका के बाइडेन प्रशासन को चिंता है कि ईरान जल्द ही इजराइल के मिलिट्री या इंटेलिजेंस टारमेट्स पर हमला कर सकता है। इजराइल-हमास जंग की शुरुआत से ही अमेरिका, इजराइल को सपोर्ट कर रहा है।
ईरानी हमले को लेकर इजराइल डरा हुआ है
इजराइल को ईरान की तरफ से हमले की आशंका है। इसलिए उसने जीपीएस नेविगेशन सिस्टम बंद कर दिया है। माना जाता है कि गाइडेड मिसाइलों को रोकने के लिए जीपीएस को बंद किया जाता है।
इसके अलावा सभी सैनिकों की छुट्टियां रद्द कर दी गईं हैं। सेना ने कहा कि हमारे सैनिक पहले से युद्ध में हैं। स्थिति को देखते हुए अस्थायी रूप से लड़ाकू इकाइयों की छुट्टी रद्द की गई है। इतना ही नहीं एयर डिफेंस कमांड को अलर्ट पर रखा गया है। कई शहरों में एंटी बॉम्ब शेल्टर शुरू कर दिए गए हैं। लोगों से कहा गया है कि वो किसी प्रकार के डर में न रहें और न ही घरों में जरूरत से ज्यादा राशन जुटाएं।
इजराइल ने सीरिया में हमला क्यों किया…
इजराइल ने सीरिया में एयरस्ट्राइक के जरिए ईरान को यह मैसेज देना चाहा कि अगर वो हमास और हिजबुल्लाह जैसे आतंकी संगठनों की मदद करता रहा तो उसके ठिकानों को निशाना बनाया जाएगा। सीरिया में ईरान की एम्बेसी है और वहां उसके कई सैनिक भी मौजूद हैं जो वहां के राष्ट्रपति बशर अल असद के लिए विद्रोही गुटों से लड़ रहे हैं। 1 अप्रैल को इजराइल ने सीरिया की राजधानी दमिश्क के करीब ऐसे ही ठिकानों को निशाना बनाया था।

इजराइल ने सीरिया में ईरान के दूतावास के पास वाली बिल्डिंग को निशाना बनाया था। इस बिल्डिंग में ईरान का वाणिज्य दूतावास था।
पूरे मिडिल ईस्ट में जंग फैल सकता है
ईरान और इजराइल के बीच दुश्मनी जगजाहिर है, लेकिन ईरान कभी सीधे तौर पर इजराइल से टकराने की हिम्मत नहीं जुटा पाया। उसने हमेशा हमास और हिजबुल्लाह जैसे आतंकी संगठनों का सहारा लिया। अब अगर ईरान सीधे तौर पर इजराइल को निशाना बनाता है तो सबसे बड़ा खतरा इस बात का है कि पूरे मिडिल ईस्ट में यह जंग फैल जाएगी और इसके नतीजे खतरनाक होंगे।
लेबनान का आतंकी संगठन है हिजबुल्लाह
हिजबुल्ला का शाब्दिक अर्थ ‘ईश्वर का दल’ होता है। हिजबुल्ला लेबनान के शिया मुसलमानों का आतंकवादी संगठन और राजनीतिक पार्टी भी है। ये संगठन ईरान के शिया मुसलमानों के सिद्धांतों पर चलता है। 1982 में ईरान के रिवॉल्यूशनरी गार्ड्स ने लेबनान में घुसे इजराइली लोगों को मारने के लिए हिजबुल्ला की स्थापना की थी।
हिजबुल्ला ईरान और सीरिया से राजनीतिक, सैद्धांतिक और सैन्य समर्थन हासिल करता रहा है, जिसके चलते इजराइल ईरान के इस संगठन से नफरत करता है।
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