
उत्तर प्रदेश के हायर एजुकेशन मिनिस्टर योगेंद्र उपाध्याय पॉपुलर इंग्लिश राइम्स पर अपने बयान की वजह से चर्चा में हैं। उन्होंने 5 मई को कानपुर में एक समारोह में कहा कि बच्चों की इंग्लिश राइम ‘जॉनी-जॉनी यस पापा’ भारतीय मूल्य और संस्कार नहीं सिखाती, बल्कि झूठ बोलना सिखाती है। इंग्लिश राइम्स बच्चों को झूठ बोलना सिखाती हैं शिक्षामित्र (पैरा टीचर्स और कॉन्ट्रैक्चुअल एजुकेटर्स) सम्मान समारोह के दौरान योगेंद्र उपाध्याय ने शिक्षा और संस्कारों पर अपनी बात रखी थी। मंत्री ने कहा कि आज की पीढ़ी को जिन मूल्यों की जरूरत है, वो इस तरह की पश्चिमी कविताओं से नहीं मिलते। हिंदी कविताएं जीवन मूल्य सिखाती हैं योगेंद्र उपाध्याय ने एक दूसरे पोएम का उदाहरण देकर कहा कि भारतीय मूल्यों में स्वांत: सुखाय यानी खुद के सुख के लिए जगह नहीं है, बल्कि वो बहुजन हिताय की बात करता है। उन्होंने कहा कि ‘रेन रेन गो अवे, माय जॉनी वॉन्ट्स टू प्ले’ जैसी कविताओं में खुद के सुख के लिए सबकी जरूरत को नजरअंदाज करना हिंदी कविताएं नहीं सिखाती। योगेंद्र उपाध्याय ने यह भी कहा कि पुरानी हिंदी कविताएं, जिन्हें पिछली पीढ़ियां पढ़ते हुए बड़ी हुईं, उनमें जीवन के गहरे मूल्य छिपे होते थे। DU की प्रोफेसर बोलीं ‘ये राइम अकाउंटेबिलिटी सिखाती है’ इस राइम को लेकर दिल्ली विश्वविद्यालय में इंग्लिश की प्रोफेसर कहती हैं, ‘हर कविता-कहानी को मॉरेलिटी के चश्मे से देखना मिनिस्टर की अपनी समझ है। लेकिन जरूरी नहीं बच्चों की सारी कविताएं-कहानियां मूल्य सिखाने के लिए हों। कुछ हंसी-मजाक के लिए भी होती हैं। ये बच्चों के ओवरऑल डेवलपमेंट के लिए जरूरी है।’ उन्होंने आगे कहा कि ये कविता पेरेंट और बच्चे के बीच बिलकुल आम बातचीत है। जो एक तरह से अकाउंटेबिलिटी सिखाता है, ये सिखाता है कि आप झूठ बोलकर आसानी से नहीं निकल सकते। आपकी अकाउंटेबिलिटी है तो मुंह खोलकर आपको प्रूफ दिखाना पड़ेगा। मंत्रियों को ये कविता जरूर पढ़नी चाहिए। उनके मुताबिक, देखा जाए तो इसी तरह की बातचीत यशोदा और कृष्ण का भी है, जब वो माखन खाने की बात से इनकार कर देते हैं। CBSE के प्री-स्कूल सिलेबस का हिस्सा है राइम बच्चों की पॉपुलर इंग्लिश राइम ‘जॉनी जॉनी यस पापा’ CBSE के नर्सरी और प्री-स्कूल सिलेबस का हिस्सा है। कई जगह बच्चों को ये सिलेबस के इतर भी पढ़ाया जाता है। हालांकि ये राइम NCERT सिलेबस का हिस्सा नहीं है। शिक्षामित्रों का मानदेय 10 से बढ़ाकर 18 हजार रुपए किया कार्यक्रम के दौरान उन्होंने 12 शिक्षामित्रों को मानदेय बढ़ोतरी के प्रतीकात्मक चेक भी सौंपे। उन्होंने बताया कि सरकार ने शिक्षामित्रों का मानदेय 10 हजार रुपए से बढ़ाकर 18 हजार रुपए कर दिया है। मंत्री के मुताबिक इससे खासकर ग्रामीण और दूरदराज इलाकों में काम कर रहे शिक्षामित्रों के जीवन स्तर में सुधार होगा। साथ ही उन्होंने दोहराया कि शिक्षा को सिर्फ पाठ्यक्रम तक सीमित नहीं रखा जा सकता, उसमें संस्कार और मूल्य भी शामिल होने चाहिए। ——————- ये खबर भी पढ़ें… NIT कुरुक्षेत्र में 2 महीने में 4 स्टूडेंट्स का सुसाइड:कॉलेज ने एग्जाम तक छुट्टी घोषित की, प्रोफेसर कहते हैं-कैंपस से बाहर जाकर सुसाइड करो NIT कुरुक्षेत्र में 2 महीने में 4 कॉलेज स्टूडेंट्स की सुसाइड से मौत हो गई। ये नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी यानी NIT कुरुक्षेत्र में 16 फरवरी से 16 अप्रैल तक में हुई मौतों का आंकड़ा है। इन 4 स्टूडेंट्स ने या तो एकेडमिक या फिर फाइनेंशियल प्रेशर की वजह से अपनी जान दी। पूरी खबर पढ़ें…
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