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there may be a change in the pattern of jee advanced Adaptive Learning Suggested | JEE Advanced के पैटर्न में हो सकता है बदलाव: परीक्षा में एडैप्टिव टेस्टिंग लाने का विचार, छात्रों की क्षमता के अनुसार होंगे सवाल


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4 घंटे पहले

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इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी यानी IIT एंट्रेंस एग्जाम का पैटर्न बदल सकता है। दरअसल, IIT काउंसिल ने JEE Advanced के पैटर्न में बदलाव करने का प्रस्ताव दिया है। IIT काउंसिल, IITs के संचालन की हाईएस्ट गवर्निंग बॉडी है, जिसमें सभी 23 IITs और केंद्रीय शिक्षामंत्री खुद शामिल हैं।

अब JEE Advanced को ‘एडैप्टिव टेस्टिंग (Adaptive Testing)’ के पैटर्न पर आयोजित करने का फैसला लिया जा सकता है।

एडैप्टिव टेस्टिंग एक मॉडर्न और एडवांस्ड एग्जामिनेशन सिस्टम है। इसमें छात्रों को सॉल्व करने के लिए मिलने वाले प्रश्न उसकी क्षमता पर अनुसार होगा। यानी जैसे-जैसे छात्र सवालों के जवाब देता है, वैसे-वैसे अगला प्रश्न आसान या कठिन होता जाता है।

क्वालिटी और एबिलिटी वाले स्टूडेंट्स के सिलेक्शन के लिए एडैप्टिव टेस्टिंग एक इफेक्टिव ऑप्शन माना जाता है। इससे स्टूडेंट्स की क्वेश्चंस सॉल्व करने की क्षमता (Question Solving Skills) का सही मूल्यांकन हो जाता है।

एडैप्टिव टेस्ट में छात्रों को कैलिब्रेटेड यानी उनकी क्षमता के अनुसार सवाल दिए जाते हैं। इसके आधार पर दो तरह का आकलन होता है-

  • एक्युरेसी: छात्र कितने सही जवाब दे रहा है।
  • एबिलिटी: वह किस कठिनाई स्तर तक सवाल हल कर सकता है।

जब चयन इन दोनों पैमानों पर किया जाता है, तो बेहतर और सटीक फिल्टरिंग प्रक्रिया सुनिश्चित होती है। इससे केवल सब्जेक्ट नॉलेज ही नहीं, बल्कि स्पेशल इंटेलिजेंस एबिलिटी और प्रॉब्लम सॉल्विंग स्किल रखने वाले छात्र ही परीक्षा में सफल हो पाते हैं।

JEE Advanced में एडैप्टिव टेस्टिंग के 5 उद्देश्य

  • छात्रों पर परीक्षा का मानसिक दबाव कम करना।
  • रटने (मेमोरी-बेस्ड) के बजाय समझ आधारित चयन सुनिश्चित करना।
  • क्रिटिकल थिंकिंग, लॉजिकल रीजनिंग और इंटेलिजेंस एबिलिटी के आधार पर सिलेक्शन।
  • कोचिंग-सेंट्रिक तैयारी के प्रभाव को सीमित करना।
  • पेपर लीक और परीक्षा संबंधी अनियमितताओं पर नियंत्रण।

स्ट्रेस का कनेक्शन परीक्षा पैटर्न से नहीं

शिक्षाविदों का मानना है कि छात्रों का स्ट्रेस सीधे तौर पर परीक्षा पैटर्न से नहीं जुड़ा होता। स्ट्रेस एक अलग मनोवैज्ञानिक प्रक्रिया है, जो मुख्य रूप से हाई कॉम्पिटीशन, लिमिटेड सीट्स और सोशल एक्सपेक्टेशन्स यानी सामाजिक अपेक्षाओं से पैदा होती है, इसलिए केवल परीक्षा को एडैप्टिव बना देने से यह मान लेना कि छात्रों का तनाव अपने आप कम हो जाएगा, व्यावहारिक रूप से सही नहीं लगता।

कोचिंग पर निर्भरता नहीं होगी कम

इसी तरह, कोचिंग पर निर्भरता कम होने के दावे को भी एक्सपर्ट थोड़ी सावधानी से देखते हैं। क्योंकि एडैप्टिव टेस्टिंग सिस्टम वाले इंटरनेशनल एग्जाम जैसे- GRE, GMAT, TOEFL और IELTS—के लिए भी बड़ी संख्या में छात्र कोचिंग लेते हैं। फर्क बस इतना है कि वहां कोचिंग का तरीका और फोकस बदल जाता है, लेकिन कोचिंग की भूमिका पूरी तरह खत्म नहीं होती।

एक्सपर्ट्स के अकॉर्डिंग, एडैप्टिव टेस्टिंग से यह जरूर हो सकता है कि कोचिंग का स्वरूप बदले—रटने की बजाय रणनीति, लॉजिक और टाइम मैनेजमेंट पर जोर बढ़े। लेकिन यह मान लेना कि इससे कोचिंग पर निर्भरता खत्म हो जाएगी, फिलहाल इसके ठोस संकेत नजर नहीं आते।

कुल मिलाकर, एडैप्टिव टेस्टिंग को परीक्षा सुधार का एक अहम कदम माना जा सकता है, लेकिन इससे जुड़े प्रभावों—जैसे स्ट्रेस और कोचिंग—को लेकर अतिशयोक्तिपूर्ण दावे करने से बचना चाहिए।

अभी स्टूडेंट तय करते हैं सेक्शन-वार टाइम

अभी तक JEE Advanced का पेपर 3 घंटे का होता है, जिसमें छात्रों को फिजिक्स, केमिस्ट्री और मैथ्स (PCM) – तीनों विषयों के सवाल हल करने होते हैं। इस मौजूदा सिस्टम में समय का बंटवारा छात्र खुद करता है। यानी कोई छात्र चाहे तो फिजिक्स को 45 मिनट दे, केमिस्ट्री को 30 मिनट और मैथ्स को डेढ़ घंटा- इस पर कोई रोक नहीं होती।

लेकिन अगर एडैप्टिव टेस्टिंग सिस्टम लागू होता है, तो परीक्षा का तरीका पूरी तरह बदल जाएगा।

एडैप्टिव टेस्ट में सवाल पहले से तय नहीं होंगे, और छात्र किसी एक सेक्शन पर मनचाहा समय नहीं लगा पाएगा।

एडैप्टिव टेस्ट में सवाल पहले से तय नहीं होंगे, और छात्र किसी एक सेक्शन पर मनचाहा समय नहीं लगा पाएगा।

एडैप्टिव सिस्टम में कंप्यूटर छात्र के हर जवाब के आधार पर अगला सवाल तय करेगा। इसका मतलब यह होगा कि परीक्षा समय और सवाल दोनों के मामले में ज्यादा कंट्रोल्ड और स्ट्रक्चर्ड हो जाएगी। ऐसे में एडैप्टिव मॉडल, मौजूदा JEE Advanced पैटर्न से काफी अलग और नया एक्सपीरियंस होगा।

पायलट प्रोजेक्ट के रूप में एक ऑप्शनल एडैप्टिव मॉक टेस्ट होगा

IIT काउंसिल ने सुझाव दिया है कि JEE Advanced के परीक्षा पैटर्न में कोई भी बदलाव करने से पहले छात्रों के परफॉर्मेंस का डेटा इकट्ठा किया जाना चाहिए। उनका मानना है कि बिना डेटा के सीधे बदलाव करना सही नहीं होगा। इसी उद्देश्य से यह सिफारिश की गई है कि JEE Advanced से पहले एक पायलट प्रोजेक्ट के रूप में एक ऑप्शनल एडैप्टिव मॉक टेस्ट आयोजित किया जाए।

  • यह मॉक टेस्ट पूरी तरह ऑप्शनल होगा।
  • इसका मकसद छात्रों को आंकना और सिस्टम को परखना होगा, न कि चयन करना।

यह एडैप्टिव मॉक टेस्ट JEE Advanced परीक्षा से करीब दो महीने पहले आयोजित किया जाएगा, ताकि,

  • छात्रों के प्रदर्शन का विश्लेषण किया जा सके।
  • एडैप्टिव सिस्टम की कार्यप्रणाली समझी जा सके।
  • साथ ही यह तय किया जा सके कि भविष्य में पैटर्न बदलना व्यावहारिक होगा या नहीं।

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Tiwari Aka

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