लंदन8 मिनट पहले
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विरांश भानुशाली ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी (ब्रिटेन) में कानून की पढ़ाई कर रहे हैं। उनका जन्म मुंबई में हुआ है।
ब्रिटेन की मशहूर ऑक्सफोर्ड यूनियन सोसाइटी में भारतीय और पाकिस्तानी छात्र के बीच डिबेट हुई थी। इस डिबेट में भारतीय पक्ष की तरफ से मुंबई के छात्र विरांश भानुशाली और पाकिस्तानी पक्ष की तरफ से मूसा हर्राज ने हिस्सा लिया था।
यह डिबेट नवंबर में हुई थी, जिसका वीडियो अब सोशल मीडिया पर वायरल है। डिबेट का मुद्दा था कि क्या भारत की पाकिस्तान नीति सिर्फ चुनाव जीतने के लिए बनाई गई एक ‘लोकप्रिय राजनीति’ है, जिसे सुरक्षा नीति का नाम दिया जाता है?
बहस के दौरान भानुशाली ने मुंबई के 26/11 हमले को कड़वा सबक बताते हुए कहा कि हमने यह बात मुश्किल तरीके से सीखी है कि जिस देश (पाकिस्तान) में शर्म नहीं होती, उसे आप शर्मिंदा नहीं कर सकते।
विरांश बोले- भारत की पॉलिसी दिखावे की नहीं, सुरक्षा की
बहस के दौरान मूसा हर्राज ने भारतीय पक्ष पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा- भारत में जब भी कोई समस्या होती है, हर बात के लिए पाकिस्तान को दोष दे दिया जाता है। भारत की सरकार पाकिस्तान के नाम पर डर दिखाकर लोगों का समर्थन पाना चाहती है। क्या यह सुरक्षा है या सिर्फ राजनीति?
इस पर विरांश भानुशाली ने तार्किक जवाब दिया। उन्होंने कहा- मैं मुंबई से हूं। मैंने 26/11 के हमले अपनी आंखों के सामने होते देखे हैं। उस रात मेरी मौसी उसी स्टेशन से गुजरती थीं, जहां आतंकियों ने हमला किया। वह संयोग से बच गईं, लेकिन 166 लोग नहीं बच सके। क्या आप इसे राजनीति कहेंगे?
हर्राज ने फिर सवाल किया- लेकिन हर देश में हिंसा होती है। क्या हर बार सख्त नीति अपनाना जरूरी है? क्या यह जनता को खुश करने का तरीका नहीं है?
भानुशाली ने जवाब दिया- अगर घर के आस-पास चोरियां हो रही हों, तो क्या आप दरवाजे पर ताला नहीं लगाएंगे? क्या ताला लगाना दिखावा है या सुरक्षा? भारत की नीति भी ऐसी ही है।
‘भारत पर आतंकवाद को थोपा गया’
बहस के दौरान भानुशाली ने कहा कि इस बहस को जीतने के लिए मुझे भाषण नहीं, सिर्फ एक कैलेंडर चाहिए। उन्होंने तारीखें गिनाते हुए पूछा कि 1993 में मुंबई धमाके हुए, तब कौन सा चुनाव था? 2008 में 26/11 हुआ, तब कौन सा चुनाव था? पठानकोट, उरी, पुलवामा, क्या ये सब सिर्फ वोट के लिए हुए? नहीं, ये हमले इसलिए हुए क्योंकि आतंकवाद लगातार भारत पर थोपा गया।
इस पर हर्राज ने कहा- अगर ऐसा है, तो 26/11 के बाद भारत ने युद्ध क्यों नहीं किया? अगर खतरा इतना बड़ा था तो?
भानुशाली ने जवाब दिया- क्योंकि भारत ने जिम्मेदारी दिखाई। उस समय जनता का गुस्सा बहुत था। अगर सरकार सिर्फ लोकप्रिय होना चाहती, तो तुरंत हमला करती। लेकिन भारत ने संयम रखा, सबूत दिए, दुनिया को दिखाया कि कौन दोषी है। यह राजनीति नहीं, समझदारी थी।
फिर भानुशाली ने सवाल किया- क्या उस संयम से शांति मिली? नहीं। उसके बाद भी पठानकोट, उरी और पुलवामा हुए। तो हमें अपनी सुरक्षा को गंभीरता से लेना ही पड़ेगा।
विरांश बोले- पहलगाम में पर्यटकों को धर्म पूछकर मारा गया
हर्राज ने कहा कि आप (भारत) आज भी हर घटना के लिए पाकिस्तान को जिम्मेदार ठहराते हैं। क्या यह सही है?
भानुशाली ने जवाब दिया- हाल ही में पहलगाम में पर्यटकों को धर्म पूछकर मारा गया। उन्होंने यह नहीं पूछा कि उन्होंने किसे वोट दिया। वे सिर्फ भारतीय थे। क्या यह भी राजनीति है?
इसके बाद उन्होंने पाकिस्तान पर तंज किया। उन्होंने कहा- अगर असली दिखावटी राजनीति कहीं है, तो वह पाकिस्तान में है। जब भारत कोई कार्रवाई करता है, तो हम जांच करते हैं। लेकिन वहां इसे जश्न और तमाशा बना दिया जाता है। जब आप अपने लोगों को रोटी नहीं दे सकते, तो उन्हें तमाशा दिखाते हैं।
‘भारत आतंकवाद नहीं बल्कि शांति चाहता है’
बहस के दौरान हर्राज ने कहा कि तो क्या भारत युद्ध चाहता है? इस पर विरांश भानुशाली ने साफ कहा कि नहीं। भारत युद्ध नहीं चाहता। हम शांत पड़ोसी बनकर रहना चाहते हैं। हम चाहते हैं कि व्यापार हो, एनर्जी और प्रोडक्ट का आदान-प्रदान हो। लेकिन जब तक आतंकवाद को पॉलिसी की तरह इस्तेमाल किया जाएगा, तब तक हम चुप नहीं बैठ सकते।
अंत में उन्होंने ने कहा कि अगर अपने लोगों की जान बचाना लोकप्रिय कहलाता है, तो हां, हम लोकप्रिय हैं। लेकिन यह राजनीति नहीं, जिम्मेदारी है।
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