Monday , 22 June 2026

Petition challenging rollout of E20 petrol dismissed | पेट्रोल में एथेनॉल मिलाने से रोकने की याचिका खारिज: सुप्रीम कोर्ट में सरकार बोली- याचिकाकर्ता इंग्लैंड का, बाहरी नहीं बताएगा कौन सा पेट्रोल इस्तेमाल करें


नई दिल्ली17 घंटे पहले

  • कॉपी लिंक
भारत में 2023 से पेट्रोल में एथेनॉल मिलाया जा रहा है। - Dainik Bhaskar

भारत में 2023 से पेट्रोल में एथेनॉल मिलाया जा रहा है।

सुप्रीम कोर्ट ने आज 1 सितंबर को पेट्रोल में एथेनॉल मिलाने के प्लान को चुनौती देने वाली याचिका खारिज कर दी। इस प्लान के तहत देश में बिकने वाले पेट्रोल में 20% एथेनॉल मिलाया जा रहा है। 2023 में एथेनॉल मिलाने की शुरुआत की गई थी।

सरकार ने 2025-26 तक देश के सभी पेट्रोल पंप्स पर E20 पेट्रोल उपलब्ध कराने का टारगेट रखा है। चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) बीआर गवई और जस्टिस के विनोद चंद्रन की बेंच ने ये फैसला सुनाया। ये याचिका वकील अक्षय मल्होत्रा ने दायर की थी।

याचिकाकर्ता के मुताबिक अप्रैल 2023 से पहले भारत में बनी गाड़ियां एथेनॉल मिले पेट्रोल के साथ काम नहीं कर सकतीं। साथ ही BS-VI स्टैंडर्ड गाड़ियां भी इसके लिए कंपैटिबल नहीं हैं। इसलिए उपभोक्ताओं को बिना एथेनॉल वाले फ्यूल को चुनने का ऑप्शन मिलना चाहिए।

अटॉर्नी जनरल आर वेंकटरमणि ने सरकार की ओर से कोर्ट में कहा- ये याचिकाकर्ता इंग्लैंड का निवासी है। कोई बाहरी व्यक्ति हमें बताएगा कि कौन सा पेट्रोल इस्तेमाल करना है।

याचिका में माइलेज 6% कम होने की बात कही

सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ वकील शादान फरासत ने 2021 की नीति आयोग की एक रिपोर्ट का जिक्र किया, जिसमें पुरानी गाड़ियों- खासकर 2023 से पहले बनी गाड़ियों के लिए एथेनॉल मिक्स पेट्रोल से माइलेज 6% कम होने की चिंता जताई गई थी।

उन्होंने कहा, ‘हमें ऑप्शन तो दिया जाए … हम E20 के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन कम से कम सप्लायर्स को हमें बताना चाहिए कि कुछ गाड़ियां इसके साथ कम्पैटिबल नहीं हैं। सिर्फ अप्रैल 2023 के बाद बनी गाड़ियां ही E20 को झेल सकती हैं।’

याचिका में ये भी कहा गया है कि 20% एथेनॉल मिलाने के बावजूद पेट्रोल की कीमत कम नहीं हुई, जिसका फायदा कंज्यूमर्स को नहीं मिल रहा।

मंत्रालय ने कहा- E20 फ्यूल से गाड़ियों को कोई नुकसान नहीं होता

पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने अगस्त महीने की शुरुआत में इस मुद्दे पर कहा था कि E20 फ्यूल से गाड़ियों को कोई नुकसान नहीं होता।

मंत्रालय के मुताबिक, लंबे टेस्ट में 1 लाख किलोमीटर तक गाड़ियों को E20 से चलाया गया और हर 10 हजार किलोमीटर पर चेक किया गया। नतीजा ये निकला कि पावर, टॉर्क और माइलेज में कोई खास फर्क नहीं पड़ा।

हालांकि ये माना गया कि नए वाहनों में माइलेज 1-2% और पुरानी गाड़ियों में 3-6% तक कम हो सकता है, लेकिन ये ‘ड्रास्टिक’ नहीं है और इंजन ट्यूनिंग से इसे ठीक किया जा सकता है।

पुरानी गाड़ियों पर भी E20 फ्यूल का कोई असर नहीं

पुरानी गाड़ियों को लेकर चिंता जताई जा रही थी कि E20 से उनके इंजन और पार्ट्स खराब हो सकते हैं, लेकिन मंत्रालय ने साफ किया कि E20 में कॉरोजन इनहिबिटर्स (जंगरोधी तत्व) डाले गए हैं और BIS और ऑटोमोटिव इंडस्ट्री स्टैंडर्ड्स के तहत सेफ्टी सुनिश्चित की गई है।

अगर पुरानी गाड़ियों में 20000 – 30000 किलोमीटर चलने के बाद रबर पार्ट्स या गास्केट्स बदलने पड़ें, तो ये रूटीन मेंटेनेंस का हिस्सा है और सस्ता भी है।

क्या होता है एथेनॉल?

एथेनॉल एक तरह का अल्कोहल है, जो स्टार्च और शुगर के फर्मेंटेशन से बनाया जाता है। इसे पेट्रोल में मिलाकर गाड़ियों में इको-फ्रैंडली फ्यूल की तरह इस्तेमाल किया जाता है। एथेनॉल का उत्पादन मुख्य रूप से गन्ने के रस से होता है, लेकिन स्टार्च कॉन्टेनिंग मटेरियल्स जैसे मक्का, सड़े आलू, कसावा और सड़ी सब्जियों से भी एथेनॉल तैयार किया जा सकता है।

  • 1G एथेनॉल : फर्स्ट जनरेशन एथेनॉल गन्ने के रस, मीठे चुकंदर, सड़े आलू, मीठा ज्वार और मक्का से बनाया जाता है।
  • 2G एथेनॉल : सेकेंड जनरेशन एथेनॉल सेल्युलोज और लिग्नोसेल्यूलोसिक मटेरियल जैसे- चावल की भूसी, गेहूं की भूसी, कॉर्नकॉब (भुट्टा), बांस और वुडी बायोमास से बनाया जाता है।
  • 3G बायोफ्यूल : थर्ड जनरेशन बायोफ्यूल को एलगी से बनाया जाएगा। अभी इस पर काम चल रहा है।

अप्रैल से देश में बिक रहा E-20 पेट्रोल

पेट्रोल-डीजल गाड़ियों से होने वाले एयर पॉल्यूशन को रोकने और फ्यूल के दाम कम करने के लिए दुनियाभर की सरकारें एथेनॉल ब्लेंडेड फ्यूल पर काम कर रही हैं। भारत में भी एथेनॉल को पेट्रोल-डीजल के विकल्प के रूप में देखा जा रहा है। इससे गाड़ियों का माइलेज भी बढ़ेगा।

देश में 5% एथेनॉल से प्रयोग शुरू हुआ था जो अब 20% तक पहुंच चुका है। सरकार अप्रैल के महीने में नेशनल बायो फ्यूल पॉलिसी लागू कर E-20 (20% एथेनॉल + 80% पेट्रोल) से E-80 (80% एथेनॉल + 20% पेट्रोल) पर जाने के लिए प्रोसेस शुरू कर चुकी है।

इसके अलावा देश में अप्रैल से सिर्फ फ्लेक्स फ्यूल कंप्लाइंट गाड़ियां ही बेची जा रही हैं। साथ ही पुरानी गाड़ियां एथेनॉल कंप्लाएंट व्हीकल में चेंज की जा सकेंगी,

​​​​​​एथेनॉल मिलाने से क्या फायदा है?

पेट्रोल में एथेनॉल मिलाने से पेट्रोल के उपयोग से होने वाले प्रदूषण को कम करने में मदद मिलेगी। इसके इस्तेमाल से गाड़ियां 35% कम कार्बन मोनोऑक्साइड का उत्सर्जन करती है। सल्फर डाइऑक्साइड और हाइड्रोकार्बन का उत्सर्जन भी एथेनॉल कम करता है। एथेनॉल में मौजूद 35% ऑक्सीजन के चलते ये फ्यूल नाइट्रोजन ऑक्साइड के उत्सर्जन को भी कम करता है।

  • आम आदमी को क्या फायदा : एथेनॉल मिलावट वाले पेट्रोल से चलने वाली गाड़ी पेट्रोल के मुकाबले बहुत कम गर्म होती हैं। एथेनॉल में अल्कोहल जल्दी उड़ जाता है, जिसके चलते इंजन जल्द गर्म नहीं होता है। इसके अलावा ये कच्चे तेल के मुकाबले काफी सस्ता पड़ेगा। इससे भी महंगाई से राहत मिलने की उम्मीद है।
  • किसानों को फायदा : एथेनॉल का इस्तेमाल बढ़ने से किसानों की आमदनी भी बढ़ेगी क्योंकि एथेनॉल गन्ने, मक्का और कई दूसरी फसलों से बनाया जाता है। चीनी मिलों को कमाई का एक नया जरिया मिलेगा और कमाई बढ़ेगी। एथेनॉल से किसानों को 21 हजार करोड़ रुपए का फायदा हुआ है।
खबरें और भी हैं…


Source link
Tiwari Aka

Check Also

Royal Enfield Flying Flea C6 Electric Bike Delivery Starts in Bengaluru

Hindi NewsTech autoRoyal Enfield Flying Flea C6 Electric Bike Delivery Starts In Bengaluru | 154km …

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *